Sunday, September 16, 2007

Dosti ka rishta





माना दोस्ती का रीश्ता खून का नही होता;
लेकीन खुन के रीश्ते से कम भी नही होता|

दोस्ती मे एक बात मुझे समझ नही आती है;
दोस्त मे लाख बुराई हो उसमे अच्छाई ही क्यु नजर आती है|

"अनमोल मोती"


चिरागों से अगर अँधेरा दूर होता,

तो चाँद की चाहत किसे होती.

कट सकती अगर अकेले जिन्दगी,

तो दोस्ती नाम की चीज़ ही न होती.

कभी किसी से जीकर ऐ जुदाई मत करना,

इस दोस्त से कभी रुसवाई मत करना,

जब दिल उब जाए हमसे तो बता देना,

न बताकर बेवफाई मत करना.

दोस्ती सची हो तो वक्त रुक जता है

अस्मा लाख ऊँचा हो मगर झुक जता है

दोस्ती मे दुनिया लाख बने रुकावट,

अगर दोस्त सचा हो तो खुदा भी झुक जता है.

दोस्ती वो एहसास है जो मिटती नही.

दोस्ती पर्वत है वो, जो झुकता नही,

इसकी कीमत क्या है पूछो हमसे,

यह वो "अनमोल मोती" है, जो बिकता नही . . .

सची है दोस्ती आजमा के देखो..

करके यकीं मुझपर मेरे पास आके देखो,

बदलता नही कभी सोना अपना रंग ,

चाहे जितनी बार आग मे जला के देखो |