
राहु छाया ग्रह है, इसलिये यह किसी भी भौतिक दान से नही हल्का किया जा सकता है इससे शांति प्राप्त करने के लिये राहु को भोज देने से शांत होता है एक ऐसा भोज जो राहु वाले क्षेत्र में अपनी खुशबू फ़ैलाकर राहु से सम्बन्धित व्यक्ति जैसे: सफ़ाई कर्मचारी, शिक्षा से जुडे लोग, शराबी कबाबी लोग, गरीब बस्तियों मे रहने वाले व्यक्ति, आदि इस भोज में खिलाने के लिये पूडियां जो साइज में बडी होती है,राहु के वनस्पति घी और मंगल के लिये गुड का हलुआ, सब्जी के लिये शुक्र और शनि की युति जैसे छाछ के आलू,या छाछ की अरबी, का भोज कर दिया जाता है इस भोज में राहु को तृप्त करने के लिये जो ग्रह से सम्बन्धित कारक प्रयोग किये जाते है, उनके अन्दर गेहूँ जो सूर्य का कारक है, वनस्पति तेल जो स्वयं राहु का कारक है, गुड का हलुआ जो मंगल का कारक है, और सब्जी में छाछ और आलू शुक्र और शनि की कारक है, की सहायता लेकर राहु को खिला दिया जाता है
राहु यानी गरीब या नीची कास्ट के लोग खाना खाने के बाद तृप्त होकर आशीर्वाद देते है वह अद्र्श्य शक्ति के द्वारा जातक के जीवन में राहु की छाया को दूर करता है इसके अलावा राहु के अन्य उपायों में चांदी का उपयोग करना, घर में चांदी को दवाना अपने पास किसी न किसी तरह् से चांदी को रखना, सफ़ाई कर्मचारी को लाल मसूर की दाल का दान में देना, बीमार आदमी के बराबर के जौ या गेंहूं, पानी में बहाना या जनता मे खिलाना, पलंग के सिरहाने रात को सोते समय जौ रखना और सुबह उनको पक्षियों को खिलाना, सरकार या व्यापार के अन्दर कठिनाई के लिये जातक के वजन के बराबर कोयला या लकडी नदी में बहाना, या छाछ के आलू जनता में बांटना आदि काम किये जा सकते है
जीवन में राहु के लिये अठारह साल का समय दिया गया है और जो भी जातक के साथ जीवन का अच्छा या बुरा परिणाम राहु को देना है देता है
सरस्वती राह्उ की अधिष्ठात्री देवी है सीसा इसकी धातु है गोमेद इसका रत्न है जौ,सरसों मूली अरबी, रतालू, जिमीकन्द, मसाले, और वह पदार्थ जिनके अन्दर खुशबू अधिक दूरी तक फ़ैलती हो, राहु के मुख्य भोज्य पदार्थ है स्मृति और कल्पना करना, दूसरो को लडाना या चुगली करना और फ़िर होने वाले कारणो को देखकर मजा लेना, इसके गुण है बारूद, आसमानी बिजली, बिजली से चलने वाली मशीने, नीला रंग, शौचालय, कैरोसिन से जलने वाले दीपक या स्टोव, पैंट और पाजामा इसके भौतिक सामान है राहु सास,स्वसुर और अन्जानी रूहों का मालिक है