भगवत कृपा को उस दिन मानना चाहिए जिस दिन बिना प्रयत्न के ही कोई महापुरुष मिल जाए जो भगवान की कृपा प्राप्त करने का मार्ग समझाएं और भगवान को अपने सात्विक कर्माें से प्रसन्न कर भगवत कृपा की ही भिक्षा मांगने को उत्साहित करे।
भगवान तो सदा ही सभी को अपना स्नेह बराबर देते है और किसी भी मनुष्य में भेदभाव नहीं करते जिस तरह सूर्य अपने प्रकाश को समान रूप से सभी को देता है उसी तरह भगवान भी सभी को प्रेम व भक्ति देते है। यह मनुष्य पर निर्भर है कि वह भगवान की भक्ति में कितना समय देता है तथा कितना वह और कामों के लिए देता है। उन्होंने कहा कि भगवान को अपने सतकर्मो से प्रसन्न कर उससे सदा भगवत कृपा की ही भिक्षा मांगनी चाहिए यहीं इंसान का सात्विक धर्म है।
No comments:
Post a Comment