Tuesday, January 15, 2008

मनुष्य का निर्माण भाग्य नहीं कर्म करता है

बनावटी जीवन निराशा की जननी है। अपनी शक्ति में विश्वास रखने के साथ-साथ अपनी आकांक्षा को ऊंचा रखना अच्छा है,पर उसके लिए अपनी शक्ति का आकलन करना और उसका उपयोग करना सीखना भी आवश्यक है।

व्यक्ति का अनुभव ही उसका सबसे बडा गुरु है और श्रेष्ठ विचार सबसे अधिक मूल्यवान है। यह व्यक्ति के हाथ में है कि वह अपनी सादगी का आदर्श प्रस्थापित करे और उससे अपने विचारों की दुनिया को अनुप्राणित करे। विचार भावनाओं का भोजन है। हमारे प्राचीन भारत का जीवन-दर्शन ही सादे जीवन पर आधारित रहा है। तत्कालीन भारत के ऋषि वनों और आश्रमों में रहते थे। वे वाह्य जीवन की सुविधाओं को अधिक प्रधानतानहीं देते थे और परहित को वह अपना धर्म मानते थे। जीवन को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि उसका आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार का विकास हो। जीवन की सादगी हमारी भारतीय संस्कृति की जीवन-पद्धति का सौंदर्य है।

यह सौंदर्य चरित्रवान व्यक्ति के व्यक्तित्व से प्रस्फुटित होता रहता है। उस व्यक्ति का आंतरिक सौंदर्य आंखों को नहीं, सबकी समझ को भाता है। सात्विक जीवन का सौंदर्य अस्थायी नहीं होता, वह सतत प्रवाहित होता होने वाला है। यदि हम बुराई और असत्य से अपना ध्यान हटाकर उसे सत्य और सौंदर्य पर केंद्रित कर सकें तो हमारा जीवन कहीं अधिक सुखमय एवं जनकल्याणकारी होगा। मनुष्य जिस उच्चतम स्थान तक पहुंचना चाहता हैं, उसका चित्र अपनी आंखों के सामने उसे स्पष्ट करना होगा और विचार, लक्ष्य,इच्छा और आकांक्षाओं को उसकी प्राप्ति में लगाना होगा। मनुष्य का निर्माण भाग्य नहीं, उसकी कर्म शक्ति करती है। कर्म ही मनुष्य की आत्मा है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने अंदर नवीन चिंतन का संचार करते रहना चाहिए।

मनुष्य अपना मित्र भी है और शत्रु भी। वह अपने उत्थान और पतन का कारण स्वयं ही है। मानव जीवन के साथ ही उसके उद्देश्यों का भी जन्म होता है। वह अपने विचारों के विकास के लिए निरंतर संघर्ष करता रहता है। मनुष्य के पास साहस का भंडार है। साहस होते हुए भी यदि मनुष्य का विकास स्थिर नहीं हो पाता अथवा उसकी सोच नकारात्मक होती है तो वह अपनी आत्मिक शक्ति का सही उपयोग नहीं कर पाता है। जब मनुष्य को विश्वास हो जाता है कि उसकी शक्ति अनंत है। तब उसे अपने साहस की विशालता के कारण बडे-बडे काम साधारण जान पडते हैं। मनुष्य को अपना ध्येय ऊंचा रखना चाहिए और तन्मयता के साथ बुद्धिमतापूर्वककाम करना चाहिए।

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